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लानत है...

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , कुछ लानतें भेज रही हूँ , हर उस बात के लिए जिसने हमारे समाज को शर्मिंदा किया है ...वो बातें जो हमारे मतलबी , दिखावटी , ढोंगी और गैर-जिम्मेदार होने के सबूत हैं ... हमारे असंवेदनशील होने का प्रमाण हैं .. ' ' लानत है ....... किसी की मजबूरी का अपने फायदे में इस्तेमाल करने वाले , शख्स के ....इंसान होने पर लानत है .... धर्म , जाति के नाम और  इंसानों की मौत पर सियासत करने वाले ,नेता के ....ओहदे पर लानत है ...  पैसे और जल्दी नाम कमाने के लिए मरीजों से खिलवाड़ करने वाले ,डाक्टर के ...पेशे पर लानत है .... झूठे गवाह ,दस्तावेजों में फेर-बदल कर गलत को सही साबित करने , वकील के .... नाम पर लानत है .... गरीबों को सड़क पर कुचल कर भी सजा न पाने वाले , सुपर स्टार की ....शोहरत पर लानत है ... स्कूल में ना पढाकर , जबरन कोचिंग बुलाकर पैसे कमाने वाले , टीचर की ... मंशा पर लानत है ... ससुराल से पैसों की मदद और उपहारों की मांग करके उनकी नुमाइश करने वाले , लड़के की ....मर्दानगी पर लानत है .... किसी की आस्था और विश्वास का सहारा लेकर उसे अन्धविश्वास में...

धर्म या अधर्म (आप बताएं )

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों, हाहाकार मचा है देश में ....धर्म की लकीर बीच में है ...एक ओर हैं धर्म के नाम पर व्यापार चलाने वाले बाबा के अन्धविश्वासी अराजक भक्त हैं ...तो दूसरी ओर हैं वो लोग जो वास्तविकता और विकास के पक्षधर हैं . मैं यदि नास्तिक नहीं हूँ तो बहुत नेम-धरम वाली आस्तिक भी नहीं कहलाई जा सकती ... मैं मंदिर नहीं जाती , पूजा भी ठीक से नहीं करना जानती , मैं व्रत भी गिने - चुने और अपनी सुविधा से ही करती हूँ . मैं किसी मामले में आदर्श महिला नहीं हूँ .लेकिन मैं अपना काम पूजा की तरह ही करती हूँ , मैं किसी क्लब या किटी की सदस्या भी नहीं हूँ ( अक्सर ऐसे सदस्यों को मैंने सामाजिक रूप से अति दानशील और अख़बारों की सुर्ख़ियों में , फोटोज में देखा है पर निजी जीवन में घरेलू नौकरों या इनके प्रतिष्ठानों में काम करने वालों के प्रति ये असंवेदनशील और शोषण का ही भाव रखतें हैं / ये सब पर लागू नहीं होता है  ) यक़ीनन मैं अपने पर इस बात का गर्व कर सकती हूँ कि मैं किसी का दिल नहीं दुखाती और किसी को दुखी देखकर मेरा मन दुखता है , मैं भजन - आरती नहीं गाती ( वैसे मैं जानती हूँ और कीर्तन में गाती भी ...

MOBILE (Addiction)

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , मेरी एक अजीज़ मित्र ने आज अपने मोबाइल फोन से मेरे मोबाइल फोन पर इन्टरनेट के माध्यम से ये सन्देश दिया कि मुझे मोबाइल के बारें में भी एक पोस्ट डालनी चाहिए ...सबसे पहले तो मुझ पर भरोसा करने के लिए उनका दिल से शुक्रिया करना चाहूंगी...आखिर ये उनकी प्रेरणा ही थी कि मैं इस विषय के बारें में अपने विचारों को इक्टठा करके शब्दों के ताने - बाने बुनने लगी ... पिछले दिनों पहाड़ों पर परिवार के साथ घूमने जाने का अवसर मिला ...ऊँचें - नीचे रास्तों और वादियों में चहल-कदमी करना हमेंशा से लुभावना रहा है ..पर थकान भरा भी है ये ...ऐसे में जब परिवार का एक सदस्य सरदर्द के कारण हमारे साथ नहीं आया तो उसका हाल-चाल पूछने में मोबाइल का इस्तेमाल ही लम्बी चढ़ाई से बचने का एक उत्तम साधन बना , ट्रेन यात्रा के दौरान भी जब नेटवर्क की अनुपलब्धता के कारण अपने बेटे को गाड़ी के देरी से चलने के कारण समय से अवगत करने में असमर्थ महसूस कर रही थी... तब इन्टरनेट के माध्यम से सन्देश छोड़ दिया था और वो व्यर्थ परेशान  होने से बच गया था, करीब ५-६ साल पहले की बात हो गयी लगती है जब मेरे पडोसी के बेटे का आ...

यादें ( जिन्दगी के साथ भी और बाद भी )

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , अरसा हुआ मायका छोड़े ...सालों हुए सबसे दूर हुए ...पर कुछ है जो कसकता है ... ' मेरा मायका ' मेरी यादें ....आपके साथ साझा कर रही हूँ '' वो जो एक दरख़्त था पीपल का बहुत बड़ा और घना , मेरे नैहर की बंद गली के अहाते में ...अब नही रहा ! वो बड़ा घना दरख़्त पीपल का ,जो था आशियाना ढेरों परिंदों का ...वो परिंदे जो दादी की थाली लगते ही ,आंगन में उसे घेर लेते थे ...वो दादी जो रात को सोने का नाटक करने पर भी जबरन आँखों में घर का बना काजल डाल ही देती थी ऊँगली से ...वो दादी भी अब नही रही ...और दादी के वो परिंदे भी कहीं दूर किसी आशियाने का रुख कर गए वो बड़ा घना दरख़्त पीपल का , जो देता था छावं गली के धोबी और फेरी वालों को ...वो धोबी जो अपनी विरासत , पुरानी   मेज़ और इस्त्री पीतल की , अपने वारिस को देकर चला गया खुदा के पास अपने ... वो बड़ा घना दरख़्त पीपल का जो देता था सुकून से लबरेज़ हवा रात को छत के बिस्तर पर ..और बिस्तर जिस पर पड़ते ही नींद चादर की मानिंद ढक लेती थी...वो नींद भी अब नहीं रही वो बड़ा घना दरख़्त पीपल का , जिसपे डलता था झूला ,सावन का और देते थे ...

OXYGEN ( MY FOOT)

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , दिल बहुत दुःख रहा है ...साँस भी घुट रही है , सिर्फ सुनकर कि देश में साठ बच्चे पैसों , व्यापार या फिर जो कुछ भी आप नाम देना चाहें ..उसकी बलि चढ़ गए ...सिर्फ सुनकर दिल बैठ जाता है ...जब उन्होंने प्राण त्यागे होंगे तो वो कितना तड़पे होंगे ...... ईमानदारी से सोचियेगा.... क्योकि ये कभी न भूलने वाला दर्द है ...ये माँ के जिगर के टुकड़े और बाप के सपनों का खून हुआ है  ....ये इंसानियत का खून हुआ है .                                                         ' आक्सीजन त्रासदी '   नौ महीने सींच खून से , जन्म उन्हें दिया होगा      सोचो ! उन साठ नौनिहालों को माओं ने कैसे दफन किया होगा ? उनकी किलकारी ने उनके आंगन को , महकाया होगा      क्या बीती होगी माओं पर ,जब मृत देह को उठाया होगा ? निरोगी रखने उसकी काया , वो अस्पताल लाया होगा       कैसे उस काया को , बाप ने मिट्टी में मिल...

It's O.K.

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'' अरे यार ! गाड़ी ठीक से लगा दे , दूसरी गाड़ियाँ कैसे निकलेंगी "? ...." अरे भाई आप अपना सामान थोडा एडजस्ट कर लीजिये गाड़ी में दूसरी सवारियों को दिक्कत होगी " . ...." सुनिए ! कचरा डिब्बे में डाल दीजिये , यहाँ फालतू में गन्दगी फैलेगी '' . ....." मैडम ! बच्चा ठीक से पढ़ नहीं रहा थोडा ध्यान रखिये ना ''! ...." ये खाना बासी है , बुढ्हो को तो नुकसान करेगा ". ...." अरे यहाँ क्यों थूक दिया , पूरी दीवार गन्दी कर दी ''. ....'' भाईसाहब लाइन में आ जाइये , बाकि लोग भी काफी देर से खड़े हैं ". ..." बेटा पढाई पर ध्यान दो तुम्हारा रिजल्ट बिगड़ता जा रहा है ''. ....'' मैडम देखिये ना आपके बच्चे पडोसी के सामान का नुकसान कर रहे हैं ''...." सर !आपका चपरासी बीमार है उससे इतना काम नहीं हो पायेगा ''. '' कचरा मत डालिए नाली चोक हो जाएगी ''. '' आवाज़ कम कर लीजिये इतना जोर से डी. जे . बजायेंगे तो आस-पास वालो का क्या हाल होगा ''.  '' कम खाना परोसिये , क्...

हम (eves / females) part 2

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों, बहुत अच्छा लगा जब आप शुभ-चिंतकों में से दो ने महिलाओं पर लिखी मेरी पोस्ट को निर्णायक (judgemental) और एकतरफा (one-sided) बताया....यकीं  मानिये अपने विचारों को और विस्तार देने और हम सबको दुसरे दृष्टिकोण से भी देखने की प्रेरणा मिली ....दिल से शुक्रिया ...इसी तरह साथ बनाये रखिये ...हम सबको इसकी जरूरत है ... जहाँ तक मेरा मानना है अपनी पोस्ट को मैंने महिला वर्ग को सिर्फ चुगलखोर या बकवादी ही नहीं माना है ...मेरा खुद का अनुभव उनके इस  रुझान को दर्शाता है ,  और मैं ये भी कतई नहीं मानती की पुरुष पूरी तरह से इस आदत से बेलाग हैं...उन्हें भी अनर्गल चर्चाओं में शामिल देखा जा सकता है ...इसीलिए अपवादों से अपने आपको  परे रखने की गुजारिश की थी ... तो चलिए बात आगे बढ़ाते हैं...कि आखिर महिलाओं पर ही ये आक्षेप क्यों ? या कहिये कि उन्हें ही इस आदत का धनी क्यों माना जाता है ? शायद इसलिए की उन्हें आगे बढ़ने के मौके कम दिए जाते रहे , उन्हें घर की चार-दिवारी में परिवार , समाज और  जिम्मेदारियों का वास्ता देकर रोके रखा जाता रहा ,,,जिससे उनके अंदर की हसरतें (...

हम ( eves / females)

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , आज यूँ हीं मन हुआ अपनी जमात यानि महिलाओं / औरतों (इंग्लिश में बोलें तो )लेडिजो के बारे में बात करने का .... वैसे ये हम महिलायें ही कर भी सकती हैं , क्योकि इस एक ख़ास हुनर से ऊपरवाले ने मर्दों को नही नवाज़ा है.. 'बतरस 'में और वो भी चुगली या इसकी - उसकी करने में जो मज़ा और अलौकिक आनंद स्त्रीवर्ग को मिलता है उससे ये पुरुषवर्ग सर्वथा ही अनभिज्ञ है .... ईमानदारी से सोचियेगा क्योकि जो महिलायें हैं.. वो तो स्वयं प्रत्यक्ष प्रमाण हैं और जो पुरुष हैं.. वो यक़ीनन चश्मदीद गवाह हैं ...और यदि ये स्त्रियों पर ईश्वर की विशेष अनुकम्पा हैं ,तो स्वीकारने में संकोच  कैसा ... वैसे भी पुरुष अपनी प्रजाति में कम और महिला वर्ग में ज्यादा रूचि रखते हैं और महिलाएं भी तो सिर्फ अपनी जाति (महिलाओं) को ही चर्चा का उपयुक्त विषय मानती हैं, (अपवाद हर वर्ग और प्रजाति में होतें  हैं ,सो कृपया इस चर्चा को व्यक्तिगत न समझें ).     हाँ तो मेरा मानना है कि ये ढेरों बातें करने की हमारी विशेषज्ञता हमारे लिए कितनी लाभप्रद है ,हम गौर नहीं करतीं ....इस बात से कतई इंकार नहीं की हम...

दोस्ती

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , अगस्त का पहला इतवार यानि दोस्ती का त्यौहार , हर माध्यम से दोस्ती के संदेशो का आदान - प्रदान ....हर किसी दुसरे खास दिन की तरह ये दिन भी मन को प्रफ्फुलित कर देता है .... दोस्ती ' एक ऐसा रिश्ता जिसमे किस्मत , कानून या खून का दखल नहीं होता ' किस्मत से हमें घर- परिवार माँ-बाप मिलतें हैं , कानून से हमें पति-पत्नी और ससुराल के रिश्ते मिलतें हैं और खून से हमें भाई-बहन मिलते हैं ...काफी हद तक इनसे हमारा रिश्ता बहुत गहरा होता है ....पर दोस्ती , रिश्तों का शायद एक अलग ही आयाम है ...दोस्त हम खुद चुनते हैं, बनाते हैं और अपनी ही चाहतों और इच्छा से इस रिश्ते को निभाते हैं ,इसमें दिल का अहम किरदार होता है ...कभी-कभी घर वालों के खिलाफ जाकर ,कभी -कभी सामाजिक दायरों के बाहर जाकर भी .....पर दोस्ती जिस उम्र , दौर या अवस्था में हो. है बड़ी प्यारी चीज़ ....पर शर्त ये है की ईमानदार और वफादार भी हो '' जो है मन से पवित्र , वो ही सच्चा मित्र '' ...यूँ  तो आज के समय में लगभग  हम सभी के पास दोस्तों की एक लम्बी फेहरिस्त है ...पर कुछ से हम मतलब से जुड़े हैं और कुछ...

उम्मीद

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , आज जब ब्लॉग खोला तो देखा की आपके और मेरे बीच विचारों का ताना बाना थोड़ा ढीला पड़ गया है...या ये कहिये कि मेरे जज़्बात आपकी उम्मीद पर खरे नहीं उतर रहे हैं ...तभी शायद आपका स्नेह नहीं मिल पा रहा ...या ये कहिये मेरी उम्मीदें ज्यादा थीं .... उम्मीद या अपेक्षा शायद है ही ऐसी चीज़ जो हमें अपनी तरफ से सही और जायज़ मालूम होती है लेकिन जब दूसरी तरफ से आती है तो कई बार हम इसे नाजायज़ और गैरजरूरी मानते हैं ....किसी की हमसे अपेक्षा हमें दबाव या मजबूरी लगती है जबकि हमारा किसी से कुछ भी चाहना हमेशा ही पूरी तरह न्यायोचित होता है ......ईमानदारी से सोचियेगा तभी अपनी दुसरो से और दूसरों की आपसे की  जाने वाली  उम्मीदों के अंतर और उनको पूरा होने पर होने वाली ख़ुशी और पूरा न होने पर होने वाली खिसियाहट को समझ पाएंगे ..... उम्मीद की माँ-बाप सारी  ख्वाहिशे पूरी कर दें ....उम्मीद की बच्चे सारे सपने साकार कर दें ...उम्मीद की प्रेमी सितारे तोड़ कर ला दे ....उम्मीद की प्रेमिका सारे बंधन तोड़ दे ...उम्मीद की बहु का आना घर भर दे ...उम्मीद की ससुराल वाले हाथो-हाथ रखें  ......

शब्द

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , आज काफी दिनों बाद आपसे मुखातिब हूँ , कुछ मस्रुफ़ियतें थी और कुछ जिंदगी में एक बार फिर से किसी ऐसे रिश्ते (जिसकी भरपाई नहीं हो सकती )का साथ छूटने का गम और उदासी थी  , कि आपसे बात नहीं हो पाई ,   माँ-पापा के बाद सासु माँ और अब ससुर जी के देहावसान ने मन को बहुत दुखी किया . इत्तेफाक़ ऐसा है कि किसी को भी आखिरी प्रणाम नहीं कर पाई ....बस सबसे आखिरी मुलाक़ातें और उनकी आखिरी बातें ही याद हैं ..... उनकी बातें जो शब्द - शब्द बन दिमाग में चलती हैं और मन को झकझोरती हैं ....अपनी श्रध्हांजलि अर्पित करती हूँ सबको . 'शब्द ' बहुत करामाती , करिश्माई होते हैं ....गर ये नश्तर हैं , नासूर हैं , जहर हैं....तो ये राहत हैं , दवा हैं और सुकून भी हैं . जीते जी  मार देने की ताक़त है तो जिला देने का हुनर भी है इनमें  ....बस फ़र्क है तो इस्तेमाल में ... ' ये बिलकुल बेकार है , इसके बस का कुछ नहीं '..' तुम रहने दो भाई तुमसे कुछ न होगा , धरती के बोझ हो तुम'..' भगवान ने क्या सोचकर तुम्हे बनाया  है ' ..' तुमसे तो फलां - फलां ही बेहतर है '.... यूँ तो य...

देखी -सुनी

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों,  आज मन हुआ कि आपके साथ वो छोटी - छोटी कहानियां साझा करूं जो कहीं न कहीं असल जिंदगी से प्रभावित हैं ....या कहूँ कि देखी  - सुनी , कहीं पढ़ी या  किसी की बताई (आपबीती) को  अपने लफ्जों और जज्बातों में बयाँ किया है .. .औरत के हालात बदलते वक़्त के साथ उतनी तेजी से नहीं बदले हैं ...और हमारे पुरुष-प्रधान समाज में तो इसे  वैसे भी थोडा ज्यादा समय लगेगा ...सही कहा ना ?....ईमानदारी से सोचियेगा ....क्योकि तभी आप आस-पड़ोस , रिश्तेदारों , दोस्तों के साथ साथ अपना भी मूल्याङ्कन और सच्चाई का सामना भी कर पाएंगे ....                                                                      ' आदत ' ट्रे से चाय का प्याला उठाते हुए मनीष ने मीना से पूछा ," तो भाभीजी  आप भी जाब में हैं क्या "?  "जी" इससे पहले कि वो बात पूरी करती , पति आशीष ने तल्ख़ लहजे में कहा ," हाँ टाइम पास...

सुकून

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 प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , 'सुकून ' , आज के परिवेश में बहुत आम और अकसर जुबां पर आने वाला शब्द , शायद इसलिए कि कमोबेश हम सभी को इसकी तलाश है ....कारण सबके अपने - अपने और अलग - अलग हैं , पर अंत में ढूढ़ते सभी सुकून ही हैं ....मसलन कम कमाई  , पारिवारिक  कलह  , रोज-रोज की भाग दौड़ भरी जिंदगी से उकताहट , कैरियर में आगे बढने की होड़ , विलासी जीवन जीने की चाह , बच्चों के भविष्य की चिंता , जीवन में प्यार  और अपनेपन का अभाव , शारीरिक से ज्यादा मानसिक थकान , अनजाना तनाव  और यहाँ तक की लम्बी चौड़ी कमाई और नौकर की फ़ौज रखने वालो को भी इसी एक अमूर्त वस्तु  की तलाश है ....ईमानदारी से सोचियेगा ... इस फेहरिस्त में कहीं न कहीं आप अपने को भी पाएंगे.....अपने विचारों से अवगत कराईयेगा, शायद मेल खा जाएँ .....मेल न भी हो तो बातचीत से ही सुकून  मिलेगा  और शायद हमारी सुकून की इसी चाह ने वर्तमान समय में इन्टरनेट पर मोटिवेशनल स्पीच  , टी.वी. और यु ट्यूब पर धर्मगुरूओ के प्रवचन , जगह - जगह पर सत्संग के आयोजन , लाफ्टर क्लब , काऊंसलर की दुकानदारी और दिमाग को शांत ...

पीयर - प्रेशर

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  प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , 'किशोरावस्था की अपनी पोस्ट की दलीलों को ' PEER PRESSURE ' पोस्ट के सहयोग से आगे बढ़ाऊँ और बच्चो के  गलत रास्तो पर जाने की वजह भी स्पष्ट करूं.....ऐसा   मेरे कई पुराने छात्र .....(जो इस बात कोस्वीकार करते हैं कि बहुत हद तक ये ' PEER PRESSURE ' ही था ,जो उनकी छवि को धूमिल कर गया था  और उनके जीवन के कुछ समय को अँधेरे की गर्त में ले गया थ) ने सुझाव दिया ...  संजीदगी से इस मुद्दे पर अपनी बात रखना चाहूंगी ....आप भी सोच ईमानदार रखियेगा क्योकि तभी आप अपने समय को ठीक ठीक याद करके वर्तमान परिपेक्ष्य से जुड़ पाएंगे ..... 'PEER' मतलब संगी-साथी ...जिनकी हमें हर उम्र में दरकार है ..... देखिये ना तभी तो आजकल बुजुर्गों को  'OLD AGE - HOME ' में संग-साथ और स्वस्थ वातावरण में समय बिताने के लिए भेजा जाता है .... हाँ तो हम सभी की तरह या शायद सबसे ज्यादा किशोरों को संग-साथ की /दोस्तों की जरूरत है ....क्योकि उम्र के जिस दौर और बदलावों के जिस तूफ़ान से वो गुजर रहे होते हैं , उन्हें तलाश होती है किसी ऐसे की जो उसी अवस्था , स्तिथि या बदलाव का...

मेरी कलम से

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , चलिए आज कुछ अलग  बात करते हैं ...आज अपनी लिखी कुछ गज़लें आपके साथ साझा कर रही हूँ ... पसंद आये तो दाद भेजिएगा .....न आये तो आपकी सलाह का भी इन्तजार रहेगा ....आपका किसी भी तरह का जवाब आपसे बने रिश्ते की बानगी ही होगा ...                                                ' असर ' ' सोहबतें शख्सियतों पर करती हैं असर , माँ -बाप के साथ थे , थे अल्हड़ बेफिकर सोहबतें  शख्सियतों  पर करती हैं असर, यारों के साथ थे , थे नाशुकरे  मस्तकलंदर सोहबतें शख्सियतों पर करती हैं असर, जब से तेरे साथ हैं ,अलेहदा फिरतें हैं  दर बदर न इतने ऐब निकाल मुझमें  तू , दुनिया कहती है कि सब तेरी ही , सोहबत का है असर ' .                                                               ...

किशोरावस्था (टीनेज )

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , इस विषय पर लिखने के लिए मेरी प्रिय मित्रों में से एक ने कहा , शायद मेरी मित्र को लगा कि मैं इस विषय से इंसाफ कर पाऊंगी ..... इस विश्वास के लिए दिल से शुक्रिया ..... अपने २२ साला शिक्षण करियर के दौरान लगभग हर तरह के बच्चो , छोटो  से लेकर किशोरों तक से बराबर संपर्क रहा या सही कहूँ तो ( शुरुआती ५-७ सालों  को छोड़ कर )किशोरों  (टीन-एजर्स ) से ज्यादा सामना हुआ . " तूफानी उम्र " कहलाती है ये , बच्चो की गति से ज्यादा उनमे होने वाले विविध ,विचित्र एवं तीव्र बदलावों की वजह से ...... कितना मुश्किल होता है तूफ़ान का सामना ..... ईमानदारी से विचार करियेगा...क्योंकि ईमानदार सही सोच  ही  ठीक - ठीक समझने में मदद करेगी और याद दिलाएगी झंझावातों से भरा वो दौर  जिससे  या तो आप निकल चुके हैं या निकल रहे हैं... मानसिक , शारीरिक , भावनात्मक , सामाजिक और पारिवारिक बदलावों का वो समय जब अपने स्वयं से ही द्वन्द है ... ..मानसिक बदलाव प्राकृतिक रूप से बड़ा या छोटा होने के सामंजस्य में लगा देता है , शरीर अपने नैसर्गिक बदलावों  से विस्मृत करता...

टीचर

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , मेरी बहुत सी प्यारी , करीबी और पुरानी स्टूडेंट्स में से एक है वो .. पर उसका चुलबुलापन उसकी खास पहचान है ..बहुत लम्बे समय तक उसकी टीचर नहीं रही , पर दिल के तार बहुत दूर से भी रिश्ता बनाये हुए हैं ...कल जब उसने फोन पर अपनी खिलखिलाती और अपनेपन से भरी आवाज़ में मेरी पोस्ट को सराहा तो दिल बाग-बाग हो गया . हमेशा की तरह हमने पुराने दिनों का जिक्र छेड़ा और उसने फिर एक बार स्कूल लाइफ के अपने खट्टे - मीठे  अनुभवों  और अच्छे - बुरे टीचर को याद किया ...और मुझे एक बड़े प्रशन चिन्ह और इस पोस्ट को लिखने की प्रेरणा के साथ छोड़ दिया .... . कितना गहरा और शायद अंतहीन प्रभाव होता है एक गुरु का किसी भी शिष्य के जीवन पर  ...सही कहा भी गया है कि गुरु उस कुम्हार के समान है जो कच्ची मिटटी को आकार देता और पकाता है , और ये भी सही है कि छात्र के व्यक्तित्व निर्माण में सिर्फ एक ही गुरु का हाथ नहीं होता ... लेकिन ये भी कहना गलत नहीं होगा कि एक आदर्श गुरु का सापेक्ष और एक बुरे गुरु का निरपेक्ष प्रभाव बालक के अंतर्मन में सदैव ही रहता है ... कौन हैं  ये आदर्श गुरु ?...

जिम्मेदारी

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नमस्कार नहीं बस  प्यार दोस्तों , मेरी एक घनिष्ठ मित्र ने मेरी पोस्ट पर जब तारीफ के साथ मुझे निरंतरता बनाये रखने और  जिम्मेदारी निभाने का एहसास कराया तो ख़ुशी हुयी ,मुझ पर उनके भरोसे को देखकर .... दिल से शुक्रिया . बड़ा ही आम शब्द है 'जिम्मेदारी' ...जिसको हम दूसरों के लिए बड़े ही कॉन्फिडेंस के साथ इस्तेमाल करते हैं ...मसलन - " तुम्हारी भी कोई जिम्मेदारी है की सब हम ही करे , कुछ जिम्मेदार बनो कितने बड़े हो गए हो/ हो गयी हो  , हद हो गयी यहाँ तो किसी की कोई जिम्मेदारी ही नहीं है , .........इत्यादि इत्यादि . क्या है जिम्मेदारी ? कैसे और कहाँ से आती है ? क्या सब अपने हिस्से की निभा रहे हैं ? क्या दुसरो की नज़र में भी हम जिम्मेदार हैं (क्योकि अपनी नज़र में तो बस हम ही जिम्मेदार हैं ) . मेरे लिए जिम्मेदारी वैसे तो एक INBUILT FEATURE है , पर इसको बाहरी परिस्थितियों और जरूरतों के हिसाब से अपनाया भी जा सकता है (इच्छा होने पर ) लेकिन जिम्मेदारी के साथ जो कदम से कदम मिला कर चलती है या कहे की उसकी परछाई है वो है जवाबदारी .... यकीं मानिये ये एक रस्सी के दो सिरे हैं . माँ का बच्च...

आईना

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नमस्कार नहीं बस प्यार दोस्तों , हर पोस्ट के साथ आपका साथ ,आपका  प्यार और  बढ़ने की उम्मीद थी ,पर कहीं  कुछ है जो जुड़ नहीं पाया ....शायद दिल या जज्बात ....फिर भी एक आस है कि हम लोग लम्बे समय के साथी बनेगें .... वैसे आजकल कहाँ हम सही मायनो में जुड़े हुए हैं , मन के तारो से ज्यादा मोबाइल के नेटवर्क और इन्टरनेट है जो हमे साथ रखने का कारण है , और ये साथ भी मन का भ्रम है खुद से पूछिए फेसबुक या whatsapp पर कितनी बार आप सही या सच्चे मन से लाईक का बटन दबाते हैं या मन के सच्चे भावों वाली स्माइली  क्लिक करते हैं ..... ईमानदारी से सोचियेगा क्योकि सोचने की आज़ादी अभी भी ख़तम नहीं हुयी है ...एक वो ही हमारी असली ऐसी मिलिकियत है जिसमें  किसी का दखल नहीं है  ....ख्यालो को गुलाम बनने भी मत दीजियेगा, नहीं तो कंगाल हो जायेंगे . एक अकेलापन , पसंद किये जाने की भूख ,भीड़ का हिस्सा बनने की ललक और साथ ही तारीफ पाने की चाह ... ही है जिन्होंने  सेल्फी , फेसबुक , Whatsapp . Tindel (not sure abt name) और न जाने क्या क्या ईजाद करवाया है ...हम सोचते हैं हम जुड़ रहे हैं पर अब तो ह...

प्रयास

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नमस्कार नहीं बस प्यार दोस्तों , अच्छा लग रहा है आपसे रूबरू होकर  , प्यार और तव्वजो जो भी मिल रही  है आपकी.... दिल से शुक्रिया . पिछली पोस्ट पर एक पुराने स्टूडेंट ने तारीफ के साथ एक इच्छा भी जाहिर की , उसने लिखा कि  अगली बार कोई motivational post  डालूँ  ...उसकी इस लाइन  को पढकर यकीं मानिये पहले तो  बेहद ख़ुशी हुई और ये सोचकर भी बहुत अच्छा लगा की उस बच्चे को मुझ पर भरोसा है कि मेरा लिखा MOTIVATIONAL भी हो सकता है ....पर अगले ही पल एकदम से लगा कि अनजाने ही एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी आ गयी  कि अब उसके लिए कुछ ऐसा लिखना है जो दिल से निकले , जज्बातों से लबरेज़ हो और साथ ही किसी को किसी सही दिशा में ले जाये ...सच कहूँ तो एक बार को तो बिलकुल वैसा ही एहसास हुआ जैसा हरबार क्लास में घुसने से पहले होता था कि मेरा पढाया न सिर्फ मेरे बच्चे समझे बल्कि सीखे भी और कुछ खास करके दिखाए भी ...... और इसी कशमकश में लगा कि ये तो उसी ने मुझे प्रेरित कर दिया  ,किसी अलग जिम्मेदारी को उठाने के लिए..... पर चलिए एक ईमानदार कोशिश की जाये ....... बहुत सोचने पर भी ...