दिल से
नमस्कार नहीं बस प्यार दोस्तों , स्टार गोल्ड सेलेक्ट चैनल पर आज ' आईलैंड सिटी ' (फिल्म) देखते हुए इंसानी रिश्तों का एक नया रूप देखने को मिला ....' डिअर जिन्दगी ' शायद देखी हो आपने , बहुत नाम और दाम नहीं कमाया इस फिल्म ने, पर यकीं मानिये मेरे दिल और जज्बातों को छुआ इसने ....असल में नौकरी और पद बदलने के बाद से अपने आप के साथ वक़्त गुजरने का बहुत मौका मिला (या कहिये की जिंदगी में अकेलापन बढ़ गया )और फिर लगा की ऐसा बहुत कुछ है ,जो हम खुद के बारे में एक लम्बी जिंदगी जी लेने के बाद भी नहीं जान पाते या शायद जानना चाहते भी नहीं .....या के हम जानबूझ कर अपने आप को ही नजर अंदाज़ करते हैं .....मुझे लगता है चीजो से आँख फेरना ,,सच्चाई से मुहँ चुराना.. ये सब इंसानी फितरत है .... क्योकि हम इतने daring भी नहीं होते की अपनी ही कमियों , चाहतो , नफरतो या इच्छाओ को खुल कर जाहिर कर पायें .....मेरे शब्दों में जाहिर कर रही हूँ ..... " उस दिन ही हम खुल कर जियेंगे , जब ये डर न होगा की 'लोग क्या कहेंगे ' " " जिन्दगी फ़िक्र न कर , चलती रह मद्धम मद्धम...
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