' मन की बात ' प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , काफी दिनों से कुछ नहीं लिखा। इसलिए नहीं कि कुछ था ही नहीं लिखने को या किसी भी बात ने मन को झकझोरा नहीं। बल्कि सच तो ये है कि lockdown की नीरवता मन पर भी छाई थी और जब कहीं कोई आहट ना हो तो लगता है कि अब हमारे यहां कौन आएगा। वैसे ही जैसे कि मेरे blogs पर कोई response नहीं था तो लगा कि जाने दो कोई नहीं पढता और अगर नहीं पढता तो या तो उसको मेरी बातें सही नहीं लगतीं या इनमें किसी के पसंद किये जाने लायक मुद्दे नहीं हैं। और हो भी सकता है कि लोगों ने आजकल पढ़ना कम और देखना ज्यादा शुरू कर दिया हो। फिर यकायक मन में आया कि नहीं ये सब मैं किसी की प्रतिक्रिया पाने के लिए नहीं लिखती (वो अलग है कि प्रतिक्रिया साकारत्मक हो तो हमें प्रोत्साहित करती है और नाक...
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पीयर - प्रेशर
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , 'किशोरावस्था की अपनी पोस्ट की दलीलों को ' PEER PRESSURE ' पोस्ट के सहयोग से आगे बढ़ाऊँ और बच्चो के गलत रास्तो पर जाने की वजह भी स्पष्ट करूं.....ऐसा मेरे कई पुराने छात्र .....(जो इस बात कोस्वीकार करते हैं कि बहुत हद तक ये ' PEER PRESSURE ' ही था ,जो उनकी छवि को धूमिल कर गया था और उनके जीवन के कुछ समय को अँधेरे की गर्त में ले गया थ) ने सुझाव दिया ... संजीदगी से इस मुद्दे पर अपनी बात रखना चाहूंगी ....आप भी सोच ईमानदार रखियेगा क्योकि तभी आप अपने समय को ठीक ठीक याद करके वर्तमान परिपेक्ष्य से जुड़ पाएंगे ..... 'PEER' मतलब संगी-साथी ...जिनकी हमें हर उम्र में दरकार है ..... देखिये ना तभी तो आजकल बुजुर्गों को 'OLD AGE - HOME ' में संग-साथ और स्वस्थ वातावरण में समय बिताने के लिए भेजा जाता है .... हाँ तो हम सभी की तरह या शायद सबसे ज्यादा किशोरों को संग-साथ की /दोस्तों की जरूरत है ....क्योकि उम्र के जिस दौर और बदलावों के जिस तूफ़ान से वो गुजर रहे होते हैं , उन्हें तलाश होती है किसी ऐसे की जो उसी अवस्था , स्तिथि या बदलाव का...
अवसाद / depression
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों, आपको भी ये ही लगता होगा कि blood pressure और diabetes की तरह आजकल इस depression की बीमारी ने भी हर घर में अपने पाँव पसार लिए हैं ... जिसे देखो वो निराशा / depression का शिकार है ...पर ये कोई नया रोग नहीं है ! हाँ शायद चर्चा में अब आया है ... या इसके लक्षणों पर गौर अब किया गया है ... या अब इसके बारें में लोग दूसरों को बताने लगे हैं ... क्या आपको भी लगता है कि अब समाज में व्यक्ति-विशेष की अहमियत बढ़ी है ? अब व्यक्ति को समाज कि एक अहम इकाई के रूप में देखा जा रहा है ? तभी तो इतनी सारी संस्थाएं सामने आई हैं ... जो व्यक्ति के हक के लिए आवाज़ उठाती हैं ! जो उसे अपने खुद में भरोसा दिलाने में मदद करती हैं .समाज जागरूक हुआ है , परिवार , समाज , कार्यालयों में स्त्री –पुरुषों की मानसिक , मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाता है ...स्कूलों में काउंसलर रखे जाते हैं ... प्रयास सराहनीय हैं ... जीवन की गुणवत्ता बढ़ रही है और लोगों में जागरूकता आ रही है ...पर ऐसे में ये निराशा ! कुछ अजीब नही है ?? ..जब व्यक्तिगत स्वतन्त्रता , सामा...
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