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हम हिन्दुस्तानी बने !

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , बड़ी ही मजेदार लगी मुझे ये घटना जब हाल-फिलहाल में काम पर लगाई गयी मेरी कामवाली बाई ने (जिसे मैंने काम पर लगाने से पहले सिर्फ ईमानदारी, साफ़ काम करने और साफ़ -सुथरा आने की शर्त रखी थी ) काम के तीसरे दिन मुझसे बड़ी बेबाकी से पूछा ''दीदी आप कौन जात हैं ?'' एक क्षण को तो मुझे लगा कि शायद मुझे ही सुनने में गलती हुई है ..जब मैंने पूछा ,'' क्या बोल रही हो ?'' उसने कहा ''आप कौन जात हैं ?'' पूछने पर पता चला कि मेरे ही कॉलोनी में रहने वाली एक महिला ( सम्भ्रांत , अपने स्वयं के स्कूल की संचालिका  एवं खुद को बड़े खानदान और काफी सुसंस्कृत परिवार का मानने वाली )  , जिनके यहाँ मेरी बाई पहले से काम करती है , ने बाई को ये कहकर धमकाया कि ,'' पता नहीं कौन जात हैं , क्या -क्या खाते होंगे उनके घर के बर्तन धोकर आओगी तो मैं काम नहीं कराऊंगी , हम लोग पूजा-पाठ करने वाले हैं ''. मैं इस बात की शर्त लगा सकती हूँ कि अपने स्कूल में प्रवेश देने के समय , टीचरों को नौकरी देते समय , डॉक्टर से दवाई लिखवाते समय या फिर होटलों या ठेलो...

दहेज़ बनाम बढ़िया शादी

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 प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , मुझे पूरा भरोसा है कि अपने ही घर में या आस-पास आपने भी ऐसे किशोर और व्यस्क युवक युवतियों को जरूर नोटिस किया होगा जो वर्तमान समय के प्रचलित hair styles, fashion , accessories etc से प्रभावित दिखते होंगे , साफ़ शब्दों में जिनको  फिल्मो के हीरो -हीरोइन के जैसा दिखने बनने का चाव होगा ...और इसके पीछे उनकी खुद की कद-काठी , रूप-रंग या अमीर-गरीब होना मायने नहीं  रखता ... कुल  मिलाकर सपने   तो सब देखते हैं और उसमें कोई निजी खामी या कमी आड़े नही आती है .... आज के समय में अगर हम बाज़ार की बात करें तो आप देखेंगे कि बाज़ार के लगभग 90% ITEMS सिर्फ सपनों को हकीकत में बदलने का झांसा मात्र हैं ... फिर चाहे वो नकली गहने हों , सौन्दर्य -प्रसाधन हों , सस्ते दामों पर मिलने वाले FANCY DRESSES हों , शरीर को ताकत , सौष्ठव प्रदान करने वाली , वजन या लम्बाई बढाने वाली गोली या टोनिक कुछ भी हो ... सब इन्सान के सपनों का सौदा ...और कहीं इस होड़ और सपनो से भरी दुनिया में हम हकीक़त से दूर बहुत दूर होते जा रहें हैं ... . आजकल की शादियाँ देखी आपने , कितने गर्व ...

विकास ( सकारात्मक बदलाव ) समय की मांग

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों ,   सुना या  पढ़ा तो जरूर आपने भी होगा , आठ महीने की बच्ची तक का बलात्कार हो गया राजधानी दिल्ली में ,  किशोर तो अब निशानेबाजी में पारंगत हो ही गए हैं और निशाना भी सही दुश्मन (प्रिंसिपल) को बनाते हैं , स्कूल में अपने जूनियर को मार डालते हैं , MMS बनाना , नशा करना , नारेबाजी ( अधिकतर निरुदेश्य ), निजी स्वतन्त्रता के नाम पर अधिकारों का दुरूपयोग , माँ-बाप का अनादर , आधुनिकता के नाम पर अभद्रता .... ये सब एक प्रश्न उठाते हैं उन नारों पर जिनमें  हम विकास की बात करते हैं ...अपवाद हर जगह हैं ...ईमानदारी से सोचियेगा क्योंकि तभी आपको निश्चित ही अपने आस-पास ऐसे अनेक उदाहरन  मिल जायेंगे जो इनमें से किसी न किसी बात की बानगी ( साक्ष्य ) देते ही होंगे ... मैं ये लिखने के लिए प्रेरित हुई अपने एक पूर्व छात्र के फेसबुक स्टेटस को पढकर , जिसमें दिल्ली में आठ माह की बच्ची से हुए बलात्कार पर वो दुखी और शर्मिंदा है ... फिर लगा की शायद अविकसित है क्योंकि क्षत्रिय होने के बाद भी ' पद्मावत ' (फिल्म) के विरोध में नारे लगाने की जगह , क्रिकेट मैच का लुत...

' गीत ' ( मेरी माँ को समर्पित )

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , कुछ सुना रही हूँ ...कोशिश की है ..जज्बातों की लड़ी को शब्दों में ढालकर एक गीत का रूप देने की ... आपकी प्रतिक्रिया का इन्तज़ार रहेगा ....                                        '' मैं ...चाहती हूँ '' *ओस की बूंदों को दामन में भरना चाहती हूँ ,       नदी की लहरों को बाँहों में समेटना चाहती हूँ ,   हरियाले रास्तों पे मीलों चलना चाहती हूँ ,        दुनियादारी से अनजान बनकर ...प्यार करना चाहती हूँ                 मैं प्यार करना चाहती हूँ .... *पतंग सी मैं बादलों के पार जाना चाहती हूँ ,        मछली सी पानी में अठखेली करना चाहती हूँ ,    चांदनी सी चुपचाप पेड़ों पर पसरना चाहती हूँ ,        कुदरत में घुलकर ...प्यार करना चाहती हूँ               मैं प्यार करना चाहती हूँ .... * मतलबों के नातों को ...

सलाम ...भीतरी / बाहरी दोनों सेवादारों को

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , एक विचार चल रहा था दिमाग में सोचा आपसे साझा करूं ....आपकी बहुमूल्य राय का इन्तेजार रहेगा . आप भी बाज़ार में उपलब्ध 'mutual fund investment scheme ' , ' insurance policies'  से तो यक़ीनन परिचित होंगे ...और आपने उनके साथ दी जाने वाली चेतावनी ' नियम एवं शर्तें लागू ' इत्यादि के बारे में सुना ही नहीं उनको कभी न कभी पढ़ा भी होगा  ऐसा मेरा विश्वास है ... चेतावनी ' तम्बाखू और सिगरेट ' के पैकेट्स पर भी लिखी होती है ... बावजूद उसके लाखो लोग दोनों ही ( पॉलिसीस में पैसा लगाने और (या )तम्बाखू सेवन ) में जोखिम उठाने को तैयार रहते हैं और अपनी जान /माल को दाँव पर लगाते भी  हैं .... ऐसे ही बहुत से career options हैं , जिनके जोखिम जग जाहिर हैं और शायद इन्ही के चलते उनमें सुविधाओ और सहूलियतों की अधिक गुंजाईश रखी गयी या दी गयी है ...ऐसे व्यवसाय का चुनाव पूरी तरह व्यक्तिगत है बशर्ते की जान का जोखिम उसकी पहली शर्त है , कठिन परिस्थितियों का सामना , परिवार से दूरी भी निश्चित है बावजूद इसके ( यहाँ बात चयनकर्ता के हौसले या साहस या राष्ट्र प्रेम की ...

लक्ष्मी अथवा सरस्वती ! .... एक बार में एक

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , आज यूँही बैठे बैठे बचपन की कुछ बातें जो पहले मात्र जिज्ञासा थी और उनकी पारम्परिक व्याख्या अजीब लगती थी अब सही-सही समझ आती हैं ...मसलन कहा जाता था कि ' जितना घना फलदार पेड़ उतना ही झुका हुआ ', या फिर ' जहाँ लक्ष्मी हैं वहां सरस्वती नहीं '. ..पर बचपन में ये बातें confuse करती थीं ... नारियल और पपीता भी तो फलदार है पर झुके हुए तो नहीं , और जो लोग ज्यादा पढ़े डिग्रीधारी हैं वो ही तो ऊंची नौकरी में होते हैं या बड़े व्यापारी होते हैं ..... पर अब लगता है कि ये तो मात्र उपमाएं हैं और '' अपवाद तो हर क्षेत्र में होते ही हैं ' '....अब देखिये फिल्म स्टार तो बहुत हैं लेकिन ' सत्यमेव जयते ' तो एक ने ही बनाया ... या फिर ' नर्मदा आन्दोलन , चिपको आन्दोलन ' आदि भी हर कोई नहीं चलाता ...तो मतलब ये कि हर फलदार पेड़ झुका नहीं होता कुछ तने और अकड़े भी होते हैं , इसी तरह डिग्रीधारी होना न तो ये प्रमाणित करता है कि आप ऊंचे पद के दावेदार हैं और न ही ये की आप पर सच में सरस्वती की कृपा है ... हाँ ये जरूर है कि डिग्रीयों की बहुतायत आपक...

PARENTING (एक कला )

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , जानते हैं आप! हर बार पोस्ट शेयर करने के बाद कई बार कौतुहलवश बार-बार चेक करती हूँ कि फिर किसी शुभचिंतक ने ANONYMUS के नाम से कोई सुझाव या सन्देश तो नहीं  पोस्ट किया ....पर बेकार :(  खैर चलिए आज की बात करते हैं ...आज नयी पीढ़ी के दो लोगों से लम्बी बातचीत हुयी ...एक मेरा बेटा कम फ़ास्ट फ्रेंड और दूसरा मेरा भतीजा जो मुझे बहुत प्यार करता है ..ऐसा उसकी बातचीत के अपनेपन से झलकता है ...ये भगवान का आशीर्वाद ही है कि युवा वर्ग मुझसे अपनी बातें शेयर करने में हिचकता नहीं है ...उनको सुन और समझ भी पाऊँ ऐसा मेरा भरसक प्रयास रहता है और उनका उचित मार्गदर्शन भी कर सकूं ये कोशिश भी भरपूर करती हूँ ...सच कहूं तो मेरा निजी स्वार्थ भी है इसके पीछे, क्योंकि जितना उन्हें सिखाती नहीं उससे कहीं ज्यादा सीखती और समझती हूँ उनकी बातों से ...मोर्डेन ट्रेंड के बारे में , नए स्टाइल्स के बारे में , उनकी उम्र की आज के परिपेक्ष्य में परेशानियों के बारे में और उनकी उम्र के लोगो के सपनों , चाहतों और डिप्रेशन के बारे में भी ... सच कहूँ तो अंदर से अकेले , तनावग्रस्त , हैरान और परेशां हैं...

प्रशिक्षण ( training )

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , सोचा था आप लोगों से विचारों का आदान-प्रदान होगा तो कुछ नया सोचने ,समझने और जानने को मिलेगा , पर आपके विचारों और सुझावों से अवगत नहीं हो पाई ...फिर सोचा कोई नहीं शायद आपके पास समय का अभाव रहा होगा या मेरे उठाये गए मुद्दों पर कोई विशेष टिपण्णी नहीं रही होगी ....खैर छोडिये .. शिक्षा क्षेत्र से जुड़े होने के कारण बच्चों की समस्याओं , उनकी तरक्की , उनके उचित विकास और सही मार्गदर्शन की बातों पर मेरा  ज्यादा ध्यान रहता है ....आप सब भी शायद ये महसूस करते होंगे कि आज शिक्षा संस्थानों का माहौल पहले जैसा तो कतई नहीं रहा ...ना तो वैसे गुरु हैं नाही पहले जैसे छात्र और हाँ अब पहले .जैसे अभिभावक भी कहाँ रहे ! ईमानदारी से सोचियेगा क्योकि तभी आप बतौर माँ-बाप या परिचित याद कर पायेंगे कि टीचर की डांट या सजा पर शायद कभी आपने भी बच्चे की हिमायत करते हुए टीचर को समझाने , सबक सीखाने या फिर उसकी शिकायत ऊपर तक करने की बात की हो या इस बात का समर्थन किया हो कि ' teacher has no right to be strict with the child or he/she is not supposed to scold , beat or punish the child for ...

नौकरी !

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , आज बेटे ने बात बड़े ही उखड़े अंदाज़ में शुरू की थी , थोडा टटोलने पर पता चला कि नाराजगी उस बैंक कर्मचारी के ऊपर थी जो बड़े अक्खड़ तरीके से कस्टमर्स से पेश आ रहा था ...बात-चीत ने स्पीड पकड़ी तो हम दोनों ने ही अपने खट्टे (और कडवे भी) ऐसेअनुभव बांटे जो विशेषकर सरकारी कार्यालयों में ही मिलते हैं और रोष और सरदर्द का कारण होते हैं ....क्या वजह हो सकती है इन कष्टकर अनुभवों की ?? ...मेरे हिसाब से हर परिस्थिति (मसलन कामचोरी  , ग्राहकों से बेअदबी , लापरवाही , पद का दुरूपयोग इत्यादि ) में नौकरी पर बने रहने की गारंटी ,जो प्राइवेट कर्मचारी को कतई नसीब नहीं होती सालों-साल बाद जी तोड़ मेहनत के बाद भी ... ईमानदारी से जोर डालकर अपने अनुभवों को टटोलिये कभी न कभी आप भी इस दुर्व्यवहार का शिकार हुए होंगे ..तभी आप इस दर्द के मर्म को समझ पाएंगे ... मुझे लगता है कि जो दूसरा कारक इन कर्मचारियों (हरेक नहीं )के व्यहवार में तल्खी लाता है... वो व्यक्तिगत भी होता है  या शायद अनुवांशिक या शायद परिस्थिति जन्य ....व्यक्तिगत का मतलब काम का बोझ , प्रशिक्षण की कमी , जुगाडी  हुयी ,...

तमाशा ( THE PUPPET SHOW)

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों, आज टी.वी.पर यूँ ही अचानक बहुत दिन बाद ' कठपुतली' का नाच देखा तो ऐसा लगा मानो बचपन की यादों की संदूकची से कोई पुरानी ख़ूबसूरत सी मनपसन्द चीज हाथ लग गयी हो . 'कठपुतली ' कितनी मनोरंजक होती है ना ! पर शायद तब तक जब तक एक निर्जीव गुडिया है ...पर अगर वास्तविक दुनिया पर नज़र डालें तो पाएंगे की सजीव गुडिया भी हैं आस-पास . बाबाजिओं के डेरों में , कॉर्पोरेट ऑफिस आदि में ....धर्मान्धता /अन्धविश्वास , नियमों के धागों से बंधी कठपुतलियां , घड़ी की सुइयों के इशारे पर नाचती कठपुतलियां , घर-परिवार की जरूरतों को पूरा करने में खटती कठपुतलियां , राजनीति के दाँव पेचों के धागों से लटकती , सरकार के नियमों पर कमर मटकाती , कूद-कूद कर हाथ नचा नचा कर उम्मीद के इशारों पर नाचती रंग-बिरंगी , सुंदर और शरारती भांति-भांति की कठपुतलियां ...दलों के सदस्यों के रूप में गुंडा-गर्दी का खेल दिखाती , ईश्वर के नाम पर कहानी गढ़ कर लोगों को गुमराह करती ...बेरोजगारी , अशिक्षा , अवसरों की कमी , निर्रथक पढाई के बोझ से दबी , समाज के जात-पात , आरक्षण और ऊँच-नीच के भेद-भाव का शिकार 'कठ...

Excuse me ! (माफ़ करियेगा)

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , मेल-मुलाकातों , शादी - ब्याहों और दावतों का मौसम पूरे शबाब पर है ...अल्ल्लाह के फज़ल से (भगवान की कृपा से ) कुछ दावतों का invitation भी नसीब हुआ है . कार्ड इंग्लिश और  हिंदी अलग-अलग भाषाओँ में मिले ...पर कुछ निमंत्रण पत्रों में सौभाग्यवती और आयुष्मान को इंग्लिश में पढ़कर वो फीलिंग नहीं आई जो हिंदी में आती है ...इसे मेरा old fashioned होना माना जा सकता है, वैसे मैं नए तरीकों को अपनाने के प्रति खुली सोच रखती हूँ और whatsapp पर अपने सन्देश इंग्लिश वाले अक्षरों में हिंदी में ही लिख भी लेती हूँ , फिर भी जो मजा अपने blog में हिंदी लिखकर आपसे जुड़ने में आता है वो मैं ही समझ सकती हूँ ( वो बात अलग है कि इस हिंदी के चलते ही मैं बहुत सारे लोगो को अपने blog और facebook page से जोड़ नहीं पाई हूँ )....सोशल मीडिया जो कि आजकल संपर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है ...वो भी 90% अंग्रेजी भाषी है ...पिछले दिनों एक दावत में बहुत सारे बेहतरीन कपड़ों , सजे चेहरों से रूबरू हुयी , कुछ सादा और संजीदा चेहरों ने ध्यान खींचा ...एक ग्रुप college going , अंग्रेजी भाषी , सुघढ़ शरीर व...

फितरत !

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , चन्द लाइन आपकी नज़र ... '' कितनी अजीब है इंसान की फितरत ,     हर अच्छी बुरी बात कुछ दिन में बन जाती है आदत ! चेहरा छुपाना पहले शौक बना ...अब प्रदुषण ने मजबूरी में तब्दील कर दिया , पहले जो महज़ औरतों का था शगल ..पर अब तो मर्द भी ढकतें  हैं शकल,     क्योंकि फितरत तो न हम बदलेंगे ना ही हवा   हम उसे गन्दा करेंगे और वो हमें  ...     और फिर यूँ जीना हमारी आदत बन जाएगी .... पानी को ही लीजिये , अपनी फितरत के चलते हम इसे बर्बाद करतें हैं और मौका मिलने पर वो हमें ...और अब ऐसे ही जीने की आदत बन गयी है ... धर्म को ही देखिये ..हम उसका दुरूपयोग कर रहें हैं और वो हमारा , फितरत है सो सुधार हम नहीं लायेंगे ...फिर चाहे धर्म की खातिर फ़ना हो जायेगें क्या फर्क पड़ता है ऐसे ही जीना आदत बनती जा रही है ... पर इंसान का क्या ??? वो अपने ही जैसो पर किसलिए जुल्म ढाता है ?? क्यों हर समाचार अधर्म , कुकर्म , अन्याय , गुस्से , शोषण की ही गाथा गाता है ???      कैसी है ये फितरत जो दिनों-दिन आदत से ज्यादा जूनून...

आखिर धर्म ही क्यों ?

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 प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , अभी-अभी समाचारों में राफिया नाज़ , योग शिक्षक को लेकर ताज़ा - तरीन बहस को सुनते हुए मन अजीब से ख्यालों से भर गया ...कहा जा रहा है कि राफिया को योग छोड़ने की नसीहतें दी जा रही हैं, उनके धर्म के मुखियाओं की तरफ से ...शायद इसे एक शारीरिक क्रिया न मान कर किसी धर्म से जोड़ा जा रहा है ... क्या मानना है आपका ?? ये तैराकी को किस धर्म की तरफ रखना चाहेंगें आप ?? शूटिंग ( निशाने बाजी ) किस की तरफ जाएगी ?? ईमानदारी से सोचियेगा क्योकिं तब आप पाएंगे कि हमारे-तुम्हारे की शाखाएं बहुत गहरे कहीं हम सब के फायदों की जड़ों से निकली हैं ...और इन जड़ों  को  पाला-पोसा जाता है निजीस्वार्थ की खातिर . मेरी तरह शायद आपने भी ये गौर किया हो कि हमारे समाज में बहुत से ऐसे काम-धंधें है जिन में किसी धर्म विशेष का वर्चस्व है, लेकिन उन की उपयोगिता और मिलने वाले फायदे हर तबके और धर्म के लिए हैं . ऐसा क्या - क्या है जिसको हम सिर्फ धर्म के आधार पर बाँट सकते हैं  ?? सोचिये आजकल अस्पतालों में खून खरीदा नहीं जाता , खून के बदले खून दिया जाता है ...क्या उस खून के धर्म की जांच होत...

'' कभी जवाब ...कभी पहेली ''

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , चंद लाइने आपकी नज़र हैं ....                                                                       '' कभी जवाब ...कभी पहेली ''     जिंदगी थोड़ी अजीब है ....सबके पास है पर कुछ के ही करीब है ...    माँ के पास है पर ...माँ की गोद के दूध मुहें बच्चे के करीब है,    पढ़ते हुए बच्चे के पास है पर ...ड्राइंग करते बच्चे के करीब है,    पापा के पास भी है पर ...क्रिकेट देखते पापा के करीब है,   दादी के पास है पर ...मिठाई  खाती दादी के करीब है, जिंदगी थोड़ी अजीब है....कुछ की है दोस्त तो कुछ की रकीब है... कार  में बैठे बच्चे की है दोस्त तो..... बाहर से हाथ बढ़ाकर भीख मांगते बच्चे की रकीब है, करोडपती कारोबारी की है दोस्त तो ...क़र्ज़ के लिए जान पर देने वाले किसान की रकीब है, मंदिर में गुप्त दान करते भक्त की है दोस्त तो ...बाहर प्रसाद के ...

यूँ ही ( जिन्दगी )

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , .................................. इतेफाकन आज एक शख्स को देखकर यूँ ही कुछ लाइनें दिमाग में तैर गयीं तो उन्हें कागज़ पर हर्फों की शक्ल दे डाली ....पसंद आये तो बताईयेगा जरूर ...                                                                     ' रंग - चेहरों के '         ''  नारंगी , नीला , पीला ....हरा                रगों के जैसा ही होता है हर चेहरा ....हरेक अपने में खास, हरेक अपने में अलग           सूने , मुस्काते ,तपते ,उंघते ,उकताते ,चमकदार और भी न जाने कितने प्रकार                 जीवन के हर पहलू से जुड़े चेहरे , सब अपने में खास.... सब अपने में अलग           तीखे , मुलायम , सुर्ख , सर्द , सख्त ,ज़र्द ,मखमली और भी कई जज्बातों ...

सोच ( अपनी-अपनी )

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , विगत दिवाली की शुभकामनायें ...यूँ भी देश के कुछ प्रान्तों में तो दिवाली आगामी एकादशी तक मनाई जाती है ..दिए और रोशनियाँ जलाकर , खैर चलिए शुभकामनायें तो शुभ की कामना से ही दी जाती हैं तो इतने विस्तार की जरूरत नही है ... इस बार की दिवाली घर से बाहर दोस्तों , रिश्तेदारों के साथ मिलकर मनाने का अवसर मिला ...मिला इसलिए कि हमारी परम्परागत सोच तो हमे दिवाली अपने घर की ही करने की प्रेरणा देती है लेकिन कुछ कारण ऐसे बने की जाना जरूरी हो गया और ये नया अनुभव हाथ लगा ...कि अपनों से मिलना ,समय साथ गुजारना ,लीक से हट के भी त्यौहार मनाना कभी-कभी सुखद होता है . इतेफाक से देश की राजधानी में दिवाली की रात गुजारी ...जहाँ आतिशबाजी बेचने पर सरकारी रोक थी ...और उसी वजह से उम्मीद थी की पटाखों की कर्णभेदी ध्वनि और उनसे निकलने वाला घोर प्रदूश्नकारी काला धुंआ भी नहीं झेलना पड़ेगा ....पर अफ़सोस लाख प्रगतिशील होने , आधुनिक लोगों से भरा होने के बावजूद ये शहर भी उन आम शहरों की तरह ही पेश आया जो की छोटे और पिछड़े माने जाते हैं ..यानि की पटाखे चले और( इस बात पर कि रोक क्यों लगायी गय...

Career or Character ???

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    प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , आपने भी जरूर सुना होगा ...ठीक से , ध्यान से पढाई कर ले बेटा बड़े होकर 'बड़ा आदमी' बनना है...पर हम ऐसा कम ही सुनते हैं कि पढ़-लिख ले बेटा बड़ा होकर ' अच्छा आदमी' बनना है  ...व्यक्तिगत तौर पर मेरे लिए अच्छा इंसान होना बड़ा इन्सान होने से कहीं ज्यादा जरूरी है .... चाहे चंडीगढ़ का बड़े बाप के बेटे का महिला से छेड़-छाड़ करना ले लीजिये या विजय माल्या का चार सौ बीसी कर देश से पलायन या बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में महिलाओं से दुर्व्यहवार या फिर धर्म के नाम पर बड़े-बड़े धर्माधिकारियों के द्वारा महिला -अनुयायियों का शोषण या फिल्मो से जुड़े नामी -गिरामी व्यक्तियों का कास्टिंग काउच हो या देश के घोटालों के मास्टर-माइंडस ....ऐसे अनगिनत मामलें है जो तथाकथित बड़े आदमियों द्वारा अंजाम दिए गए हैं ... जाने - माने कालेजों से शिक्षा प्राप्त , समाज के उच्च वर्ग के वो पुरुष(स्त्रियां शिकार ज्यादा और शिकारी कम ही हैं , इस कारण उल्लेखनीय नहीं हैं यहाँ ) जिन्होंने माँ-बाप के अनुसार बड़े आदमी का तमगा तो माथे पे  लगा लिया पर शायद अच्छा आदमी बनने में कुछ चूक गए  .....

माहवारी ( एक कष्ट-चक्र )

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों ,  सबसे पहले तो आभार प्रकट करना चाहूंगी ,अपनी घनिष्ठ मित्र का जिन्होंने whatsapp पर ये पोस्ट मुझसे शेयर किया और  कृतज्ञता जाहिर करना चाहूंगी ,जो उन्होंने मुझे इस विषय पर अपने शब्दों में कुछ लिखने को कहा . ..विषय से न्याय करने की पूरी कोशिश रहेगी . सच कहूं तो सबसे पहले मुझे इस बात की ग्लानि हो रही थी कि इतनी सारी बातों  के बीच में मेरा खुद का ध्यान स्त्रियों की इस दुखद समस्या पर क्यों नहीं गया ..... माहवारी / मासिक धर्म ..हर स्त्री के जीवन में घटित होने वाली नैसर्गिक प्रक्रिया ..सही कहा जाये तो प्रकृति के उन कष्टदायक उपहारों में से एक ,जो सिर्फ स्त्रियों को ही बांटे गए हैं...इसका वर्ग , धर्म ,जात-पात को लेकर कोई विभाजन नहीं है ...पर कितना भयावह है इस मासिक चक्र का हर महीने ४-५ दिन सामना करना विशेषकर उनके लिए जो दो वक़्त के खाने तो क्या ठीक से तन ढकने लायक कपड़ों के भी मोहताज़ हैं . दो बार घर पर काम करने वाली और मजदूरी करने वाली दो महिलाओं से जब सूती साडी देने पर नकारात्मक प्रतिक्रिया मिली तो मैंने भी मान लिया कि सूती धोती इनके काम , रहन - सहन ...

साक्षर या शिक्षित

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , आज न्यूज़ पेपर में साक्षरता के बारें में पढ़ते-पढ़ते अनायास ही मन में एक सवाल कौंधा ....कि क्या अंतर है साक्षर और शिक्षित होने में ...आप में से यक़ीनन बहुत से लोग मेरी बात का अर्थ समझ गए होंगे ...जी हाँ ..हम साक्षरता का प्रतिशत तो बढ़ा रहें हैं पर क्या शिक्षितों की श्रेणी में आ रहे हैं ?????????? अंतर बड़ा है.... और इसे पाट पाना ही असल जीत है ...मेरे अधीनस्थ कर्मचारियों में कुछ चतुर्थ श्रेणी (4th class) भी साक्षर हैं ...और कुछ जो बेहतर ओहदों पर हैं वो साक्षर होकर भी निरक्षर समान ही कोरे कागज़ हैं ... सही समझे आप अपनी तनख्वाह या दैनिक मजदूरी कहीं पर अपना हस्ताक्षर बनाकर (या नाम ही लिखकर) लेने वाले को हम पढ़ा-लिखा (साक्षर) मानते हैं ...कुछ बेहतर सडकों पर लगे फ्लेक्स , दुकानों के बोर्ड , न्यूज़ पेपर की हैडलाइन आदि भी पढ़ लेतें हैं ...पर इनमे से ज्यादातर अपने नियोक्ता (employer) द्वारा बेवकूफ बना लिए जातें हैं ...या नेताओं द्वारा चुनावों में बरगला दिए जातें हैं ...या कार्य स्थलों पर शोषित (शारीरिक ही नहीं , क्योकिं वो तो शिक्षित भी हो जातें है ) किये जाते हैं ...य...

छाप

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प्यार भरा नमस्कार दोस्तों ,  कुछ दिन से आपसे बात नही हुयी , आप भी कुछ बेजार से रहे ...फिर आज मैंने सोचा कि बातचीत जारी रहनी चाहिए ..यूँ भी कहा जाता है कि बातचीत हर समस्या का समाधान है और चुप्पी रिश्तों का खात्मा ...और आपसे तो बहुत सी बातें करनी हैं आप जवाब नहीं भी देंगे तो क्या ...सुनेगें तो सही ना ..वो भी काफी है मन हल्का करने के लिए ...मेरी कोई न कोई बात तो आपके मन पर अपनी छाप छोड़ ही जाएगी ..बस साथ रहिएगा क्योंकि उसकी हम सब को जरूरत है ... छाप से याद आया की हम यानि इस विशाल देश के स्वतंत्र नागरिक छाप छोड़ने में बहुत माहिर हैं ...कुछ उदाहरनो से अपनी बात को पुख्ता करना चाहूंगी ...किसी भी ऐतिहासिक या नव निर्मित इमारत को देखिये अपना नाम खोदकर या पान थूककर या इश्तेहार चिपकाकर या भद्दे कमेंट लिखकर ....कचरे के डिब्बे के बाहर कचरा फेंककर , उसके आस-पास थूककर ....थिएटर , ट्रेन , बस , स्कूल आदि आदि की सीट के नीचे कागज़,छिलके इत्यादि फेंककर...अपनी पवित्र पूजनीय नदियों में कचरा , मूर्तियाँ , लाश , जूठन और भी जाने क्या-क्या बहाकर ..या कहिये की जहाँ कहीं भी हम होते हैं या जाते हैं अपनी छाप...