Posts

फलसफा - ए -जिंदगी

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , वो कहते हैं , अरे! ठीक है काम तो चल रहा है , सही बात भी है काम कभी नहीं रुकता , रुकता है ‘ मन’ , जी हाँ मन ! ये मन ही तो है जो रूक जाता है और फिर सबको हैरान करता है .....कभी किसी लालच में , कभी किसी के प्यार में , कभी किसी से नफरत में , कभी किसी   सपने में , कभी किसी लालसा में , कभी गुस्से में , और कभी इंतजार या उम्मीद में .... और जनाब एक बार रूका तो फिर जिद पकड़ लेता है , दिमाग की भी नही सुनता . कहते हैं दिल और दिमाग साथ – साथ नही चलते , पर कभी – कभी वो भी एक दूसरे से कदम मिला लेते हैं लेकिन ये जो मन है वो अडियल है ... नहीं नही मन और दिल को एक न समझें ...वो जो दिल और दिमाग को जोड़ता है ना उसी तार के बीच में कहीं अटका होता है मन ...और जैसे ही दिल दिमाग कहीं साथ होने का सोचते हैं ये अपना अलग राग शुरू कर देता है ... दिल ने कहा फलां अच्छा है , दिमाग ने तर्क दिया इसमें क्या अच्छा है ? दिल ने समझाया और अपना पक्ष रखा तो दिमाग ने कसौटी पर कसा , थोडा न- नुकुर के बाद चलो राजी भी हो गया , किन्तु ये क्या ! मन ने कहा ‘’ ना ‘’ ...होगा कोई लाख अच्छा , हो...

सापेक्षता ( a positive thought )

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , अजीब कोफ़्त सी होती है और मुझे ही नहीं यकीनन आप में से बहुत से लोगों को मेरे जैसी ही feelings आयी होंगी ...जब आपने भी समाचार पत्र में पढ़ा होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार का चुनावी घोषणा पत्र कहता है कि सरकार मंदिर – मठों के जिर्नोद्धार में 500 करोड़ और नौकरियों के क्षेत्र में 250 करोड़ का खर्च करेगी , पूरे 3000 करोड़ का बजट गौ हत्या रोकने का होगा I   मैं पहले भी इस पंक्ति को लिख चुकी हूँ शायद जो मैंने कहीं पढ़ी थी और जिसने मुझे बहुत प्रभावित भी किया था ...         ’’ आप अपने बच्चों को भविष्य के लिए क्या देना चाहेंगे ????? ‘ मंदिर , मस्जिद , चर्च और गुरुद्वारों में सिमटा समाज जो अपने – अपने धर्म और संस्कृति के संरक्षण को सर्वोपरी रखेगा या एक ऐसा समाज जहाँ उन्नत शिक्षा व्यवस्थित विद्यालयों में हो , विकसित स्वास्थ्य सेवाएं हों और रोजगार और व्यापार के पर्याप्त अवसर हों सामाजिक भेद-भाव और विघटन का मार्ग संकुचित हो . सही में एक ऐसा समाज जहाँ नैतिकता और मानवता मुख्य धर्म हों ‘ . आप में से बहुत से लोगों का मुझसे अथवा इस...

Human Resource (मानव संसाधन )

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों, पिछले दिनों डॉ अब्दुल कलम का एक भाषण youtube पर सुना , जिसकी एक पंक्ति दिल में बैठ सी गयी , जिसका मतलब कुछ यूँ था कि , भारत में हम किसी की योग्यता का उपयोग नहीं करते उसे निचोड़ लेते हैं ! ,.... वैसे ये बात मानव संसाधन का दोहन प्राकृतिक संसाधन से भी अधिक क्रूरता से करने की हमारी मानसिकता को परिलक्षित करती है ...   एक चुटकुले के माध्यम से इस शोषण की प्रवृति की तरफ ध्यान ले जाना चाहूंगी कि... मर कर जब कई लोग यमराज के दरबार में पहुचें तो चित्रगुप्त जी को उनके कर्मों के हिसाब से स्वर्ग नर्क में भेजने का काम सौंपा गया , पहले आदमी ने बताया की वो उद्योगपति था खूब पैसा कमाया जीवन में और दान पुन्य भी किया लेकिन उसकी बात पूरी होने से पहले ही यमराज ने आदेश दिया कि उसे नर्क भेजा जाये क्योंकि स्वर्ग तो उसने धरती पर ही भोग लिया था , दुसरे व्यक्ति ने बताया कि वह किसान था और तीनो फसले उगाता था और अपनी सामर्थ्य के अनुसार गावं के गरीब परिवारों को कुछ अनाज दान देता था , उसे स्वर्ग में भेजा गया ,तीसरा व्यक्ति जो अत्यंत क्षीण और डरा हुआ सा था उसने बताया क्योंकि व...

कविता ... जज्बातों की !

Image
एक कविता .......... गौरैया ! हताश , निराश , उदास कौआ दूर दूर तक उड़ रहा था , कौआ प्यासा नही था ....वो तो गौरैया को ढूँढ रहा था , गौरैया उसकी बिरादरी की नहीं थी ,पर आसमान में उसकी साथी रही थी ! उसके जैसे सबकुछ नही खाती थी , छतो , आंगनों , घरों से अनाज के दाने , रोटी के टुकड़े , छोटे नन्हे कीड़े चुग लाती थी ! उसके जैसे कांव कांव का शोर भी नही मचाती थी , चीं चीं से घर आंगन चह्काती थी , गौरैया फुदकती फिरती , रोशनदानो , पेड़ों   में घोसलें बनाती थी ! गौरैया तिनका तिनका लाती थी , बारिश आने की खबर सूखी मिटटी में पंख फडफडा कर दे जाती थी , गौरैया छत पर पानी के बर्तन पर कौए को आता देख उड़ जाती थी, जैसी भी थी... कौए को भाती थी ! पर ... पतंग के विदेशी धागों , बिना पेड़ों के कंक्रीट के जंगलों , बिजली के नंगे तारों , गाड़ियों के धुएं , आधुनिक जीवन... सबने गौरैया को मार डाला L L L                   कौआ प्यासा नहीं था .... बस अपनी नन्हीं दोस्त को MISS कर रहा था !!! ..........................

Why not NUMBER ? a replacement of NAME .....

Image
Hi friends ! Since long a thought is laying buried under many other worries of daily routine and that had once came to mind by reading a random column in newspaper , the writer stressed that making ADHAR CARD mandatory for all Indians is like stealing the identity of a person and converting it   into just   number like a prisoner.... and it struck my head ... Is it so ??? The time passed and day before yesterday the thought again peeped out of down memory lane when during morning assembly one of my students discussed the general habitual action of elephants , which when are small babies tied to a heavy iron chain tightly by their MAHAUT to check their extended movement and gradually they learn to be in limits for having been chained and simultaneously limit their outwards stretch and by the passing of time when they grow up, they are   only tied with a simple rope too meagre to hold AN ELEPHANT, even then the habitual grown up Elephant doesn’t strive for its esca...

हम हिन्दुस्तानी बने !

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , बड़ी ही मजेदार लगी मुझे ये घटना जब हाल-फिलहाल में काम पर लगाई गयी मेरी कामवाली बाई ने (जिसे मैंने काम पर लगाने से पहले सिर्फ ईमानदारी, साफ़ काम करने और साफ़ -सुथरा आने की शर्त रखी थी ) काम के तीसरे दिन मुझसे बड़ी बेबाकी से पूछा ''दीदी आप कौन जात हैं ?'' एक क्षण को तो मुझे लगा कि शायद मुझे ही सुनने में गलती हुई है ..जब मैंने पूछा ,'' क्या बोल रही हो ?'' उसने कहा ''आप कौन जात हैं ?'' पूछने पर पता चला कि मेरे ही कॉलोनी में रहने वाली एक महिला ( सम्भ्रांत , अपने स्वयं के स्कूल की संचालिका  एवं खुद को बड़े खानदान और काफी सुसंस्कृत परिवार का मानने वाली )  , जिनके यहाँ मेरी बाई पहले से काम करती है , ने बाई को ये कहकर धमकाया कि ,'' पता नहीं कौन जात हैं , क्या -क्या खाते होंगे उनके घर के बर्तन धोकर आओगी तो मैं काम नहीं कराऊंगी , हम लोग पूजा-पाठ करने वाले हैं ''. मैं इस बात की शर्त लगा सकती हूँ कि अपने स्कूल में प्रवेश देने के समय , टीचरों को नौकरी देते समय , डॉक्टर से दवाई लिखवाते समय या फिर होटलों या ठेलो...

दहेज़ बनाम बढ़िया शादी

Image
 प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , मुझे पूरा भरोसा है कि अपने ही घर में या आस-पास आपने भी ऐसे किशोर और व्यस्क युवक युवतियों को जरूर नोटिस किया होगा जो वर्तमान समय के प्रचलित hair styles, fashion , accessories etc से प्रभावित दिखते होंगे , साफ़ शब्दों में जिनको  फिल्मो के हीरो -हीरोइन के जैसा दिखने बनने का चाव होगा ...और इसके पीछे उनकी खुद की कद-काठी , रूप-रंग या अमीर-गरीब होना मायने नहीं  रखता ... कुल  मिलाकर सपने   तो सब देखते हैं और उसमें कोई निजी खामी या कमी आड़े नही आती है .... आज के समय में अगर हम बाज़ार की बात करें तो आप देखेंगे कि बाज़ार के लगभग 90% ITEMS सिर्फ सपनों को हकीकत में बदलने का झांसा मात्र हैं ... फिर चाहे वो नकली गहने हों , सौन्दर्य -प्रसाधन हों , सस्ते दामों पर मिलने वाले FANCY DRESSES हों , शरीर को ताकत , सौष्ठव प्रदान करने वाली , वजन या लम्बाई बढाने वाली गोली या टोनिक कुछ भी हो ... सब इन्सान के सपनों का सौदा ...और कहीं इस होड़ और सपनो से भरी दुनिया में हम हकीक़त से दूर बहुत दूर होते जा रहें हैं ... . आजकल की शादियाँ देखी आपने , कितने गर्व ...

विकास ( सकारात्मक बदलाव ) समय की मांग

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों ,   सुना या  पढ़ा तो जरूर आपने भी होगा , आठ महीने की बच्ची तक का बलात्कार हो गया राजधानी दिल्ली में ,  किशोर तो अब निशानेबाजी में पारंगत हो ही गए हैं और निशाना भी सही दुश्मन (प्रिंसिपल) को बनाते हैं , स्कूल में अपने जूनियर को मार डालते हैं , MMS बनाना , नशा करना , नारेबाजी ( अधिकतर निरुदेश्य ), निजी स्वतन्त्रता के नाम पर अधिकारों का दुरूपयोग , माँ-बाप का अनादर , आधुनिकता के नाम पर अभद्रता .... ये सब एक प्रश्न उठाते हैं उन नारों पर जिनमें  हम विकास की बात करते हैं ...अपवाद हर जगह हैं ...ईमानदारी से सोचियेगा क्योंकि तभी आपको निश्चित ही अपने आस-पास ऐसे अनेक उदाहरन  मिल जायेंगे जो इनमें से किसी न किसी बात की बानगी ( साक्ष्य ) देते ही होंगे ... मैं ये लिखने के लिए प्रेरित हुई अपने एक पूर्व छात्र के फेसबुक स्टेटस को पढकर , जिसमें दिल्ली में आठ माह की बच्ची से हुए बलात्कार पर वो दुखी और शर्मिंदा है ... फिर लगा की शायद अविकसित है क्योंकि क्षत्रिय होने के बाद भी ' पद्मावत ' (फिल्म) के विरोध में नारे लगाने की जगह , क्रिकेट मैच का लुत...

' गीत ' ( मेरी माँ को समर्पित )

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , कुछ सुना रही हूँ ...कोशिश की है ..जज्बातों की लड़ी को शब्दों में ढालकर एक गीत का रूप देने की ... आपकी प्रतिक्रिया का इन्तज़ार रहेगा ....                                        '' मैं ...चाहती हूँ '' *ओस की बूंदों को दामन में भरना चाहती हूँ ,       नदी की लहरों को बाँहों में समेटना चाहती हूँ ,   हरियाले रास्तों पे मीलों चलना चाहती हूँ ,        दुनियादारी से अनजान बनकर ...प्यार करना चाहती हूँ                 मैं प्यार करना चाहती हूँ .... *पतंग सी मैं बादलों के पार जाना चाहती हूँ ,        मछली सी पानी में अठखेली करना चाहती हूँ ,    चांदनी सी चुपचाप पेड़ों पर पसरना चाहती हूँ ,        कुदरत में घुलकर ...प्यार करना चाहती हूँ               मैं प्यार करना चाहती हूँ .... * मतलबों के नातों को ...

सलाम ...भीतरी / बाहरी दोनों सेवादारों को

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , एक विचार चल रहा था दिमाग में सोचा आपसे साझा करूं ....आपकी बहुमूल्य राय का इन्तेजार रहेगा . आप भी बाज़ार में उपलब्ध 'mutual fund investment scheme ' , ' insurance policies'  से तो यक़ीनन परिचित होंगे ...और आपने उनके साथ दी जाने वाली चेतावनी ' नियम एवं शर्तें लागू ' इत्यादि के बारे में सुना ही नहीं उनको कभी न कभी पढ़ा भी होगा  ऐसा मेरा विश्वास है ... चेतावनी ' तम्बाखू और सिगरेट ' के पैकेट्स पर भी लिखी होती है ... बावजूद उसके लाखो लोग दोनों ही ( पॉलिसीस में पैसा लगाने और (या )तम्बाखू सेवन ) में जोखिम उठाने को तैयार रहते हैं और अपनी जान /माल को दाँव पर लगाते भी  हैं .... ऐसे ही बहुत से career options हैं , जिनके जोखिम जग जाहिर हैं और शायद इन्ही के चलते उनमें सुविधाओ और सहूलियतों की अधिक गुंजाईश रखी गयी या दी गयी है ...ऐसे व्यवसाय का चुनाव पूरी तरह व्यक्तिगत है बशर्ते की जान का जोखिम उसकी पहली शर्त है , कठिन परिस्थितियों का सामना , परिवार से दूरी भी निश्चित है बावजूद इसके ( यहाँ बात चयनकर्ता के हौसले या साहस या राष्ट्र प्रेम की ...

लक्ष्मी अथवा सरस्वती ! .... एक बार में एक

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , आज यूँही बैठे बैठे बचपन की कुछ बातें जो पहले मात्र जिज्ञासा थी और उनकी पारम्परिक व्याख्या अजीब लगती थी अब सही-सही समझ आती हैं ...मसलन कहा जाता था कि ' जितना घना फलदार पेड़ उतना ही झुका हुआ ', या फिर ' जहाँ लक्ष्मी हैं वहां सरस्वती नहीं '. ..पर बचपन में ये बातें confuse करती थीं ... नारियल और पपीता भी तो फलदार है पर झुके हुए तो नहीं , और जो लोग ज्यादा पढ़े डिग्रीधारी हैं वो ही तो ऊंची नौकरी में होते हैं या बड़े व्यापारी होते हैं ..... पर अब लगता है कि ये तो मात्र उपमाएं हैं और '' अपवाद तो हर क्षेत्र में होते ही हैं ' '....अब देखिये फिल्म स्टार तो बहुत हैं लेकिन ' सत्यमेव जयते ' तो एक ने ही बनाया ... या फिर ' नर्मदा आन्दोलन , चिपको आन्दोलन ' आदि भी हर कोई नहीं चलाता ...तो मतलब ये कि हर फलदार पेड़ झुका नहीं होता कुछ तने और अकड़े भी होते हैं , इसी तरह डिग्रीधारी होना न तो ये प्रमाणित करता है कि आप ऊंचे पद के दावेदार हैं और न ही ये की आप पर सच में सरस्वती की कृपा है ... हाँ ये जरूर है कि डिग्रीयों की बहुतायत आपक...

PARENTING (एक कला )

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , जानते हैं आप! हर बार पोस्ट शेयर करने के बाद कई बार कौतुहलवश बार-बार चेक करती हूँ कि फिर किसी शुभचिंतक ने ANONYMUS के नाम से कोई सुझाव या सन्देश तो नहीं  पोस्ट किया ....पर बेकार :(  खैर चलिए आज की बात करते हैं ...आज नयी पीढ़ी के दो लोगों से लम्बी बातचीत हुयी ...एक मेरा बेटा कम फ़ास्ट फ्रेंड और दूसरा मेरा भतीजा जो मुझे बहुत प्यार करता है ..ऐसा उसकी बातचीत के अपनेपन से झलकता है ...ये भगवान का आशीर्वाद ही है कि युवा वर्ग मुझसे अपनी बातें शेयर करने में हिचकता नहीं है ...उनको सुन और समझ भी पाऊँ ऐसा मेरा भरसक प्रयास रहता है और उनका उचित मार्गदर्शन भी कर सकूं ये कोशिश भी भरपूर करती हूँ ...सच कहूं तो मेरा निजी स्वार्थ भी है इसके पीछे, क्योंकि जितना उन्हें सिखाती नहीं उससे कहीं ज्यादा सीखती और समझती हूँ उनकी बातों से ...मोर्डेन ट्रेंड के बारे में , नए स्टाइल्स के बारे में , उनकी उम्र की आज के परिपेक्ष्य में परेशानियों के बारे में और उनकी उम्र के लोगो के सपनों , चाहतों और डिप्रेशन के बारे में भी ... सच कहूँ तो अंदर से अकेले , तनावग्रस्त , हैरान और परेशां हैं...

प्रशिक्षण ( training )

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , सोचा था आप लोगों से विचारों का आदान-प्रदान होगा तो कुछ नया सोचने ,समझने और जानने को मिलेगा , पर आपके विचारों और सुझावों से अवगत नहीं हो पाई ...फिर सोचा कोई नहीं शायद आपके पास समय का अभाव रहा होगा या मेरे उठाये गए मुद्दों पर कोई विशेष टिपण्णी नहीं रही होगी ....खैर छोडिये .. शिक्षा क्षेत्र से जुड़े होने के कारण बच्चों की समस्याओं , उनकी तरक्की , उनके उचित विकास और सही मार्गदर्शन की बातों पर मेरा  ज्यादा ध्यान रहता है ....आप सब भी शायद ये महसूस करते होंगे कि आज शिक्षा संस्थानों का माहौल पहले जैसा तो कतई नहीं रहा ...ना तो वैसे गुरु हैं नाही पहले जैसे छात्र और हाँ अब पहले .जैसे अभिभावक भी कहाँ रहे ! ईमानदारी से सोचियेगा क्योकि तभी आप बतौर माँ-बाप या परिचित याद कर पायेंगे कि टीचर की डांट या सजा पर शायद कभी आपने भी बच्चे की हिमायत करते हुए टीचर को समझाने , सबक सीखाने या फिर उसकी शिकायत ऊपर तक करने की बात की हो या इस बात का समर्थन किया हो कि ' teacher has no right to be strict with the child or he/she is not supposed to scold , beat or punish the child for ...

नौकरी !

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , आज बेटे ने बात बड़े ही उखड़े अंदाज़ में शुरू की थी , थोडा टटोलने पर पता चला कि नाराजगी उस बैंक कर्मचारी के ऊपर थी जो बड़े अक्खड़ तरीके से कस्टमर्स से पेश आ रहा था ...बात-चीत ने स्पीड पकड़ी तो हम दोनों ने ही अपने खट्टे (और कडवे भी) ऐसेअनुभव बांटे जो विशेषकर सरकारी कार्यालयों में ही मिलते हैं और रोष और सरदर्द का कारण होते हैं ....क्या वजह हो सकती है इन कष्टकर अनुभवों की ?? ...मेरे हिसाब से हर परिस्थिति (मसलन कामचोरी  , ग्राहकों से बेअदबी , लापरवाही , पद का दुरूपयोग इत्यादि ) में नौकरी पर बने रहने की गारंटी ,जो प्राइवेट कर्मचारी को कतई नसीब नहीं होती सालों-साल बाद जी तोड़ मेहनत के बाद भी ... ईमानदारी से जोर डालकर अपने अनुभवों को टटोलिये कभी न कभी आप भी इस दुर्व्यवहार का शिकार हुए होंगे ..तभी आप इस दर्द के मर्म को समझ पाएंगे ... मुझे लगता है कि जो दूसरा कारक इन कर्मचारियों (हरेक नहीं )के व्यहवार में तल्खी लाता है... वो व्यक्तिगत भी होता है  या शायद अनुवांशिक या शायद परिस्थिति जन्य ....व्यक्तिगत का मतलब काम का बोझ , प्रशिक्षण की कमी , जुगाडी  हुयी ,...

तमाशा ( THE PUPPET SHOW)

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों, आज टी.वी.पर यूँ ही अचानक बहुत दिन बाद ' कठपुतली' का नाच देखा तो ऐसा लगा मानो बचपन की यादों की संदूकची से कोई पुरानी ख़ूबसूरत सी मनपसन्द चीज हाथ लग गयी हो . 'कठपुतली ' कितनी मनोरंजक होती है ना ! पर शायद तब तक जब तक एक निर्जीव गुडिया है ...पर अगर वास्तविक दुनिया पर नज़र डालें तो पाएंगे की सजीव गुडिया भी हैं आस-पास . बाबाजिओं के डेरों में , कॉर्पोरेट ऑफिस आदि में ....धर्मान्धता /अन्धविश्वास , नियमों के धागों से बंधी कठपुतलियां , घड़ी की सुइयों के इशारे पर नाचती कठपुतलियां , घर-परिवार की जरूरतों को पूरा करने में खटती कठपुतलियां , राजनीति के दाँव पेचों के धागों से लटकती , सरकार के नियमों पर कमर मटकाती , कूद-कूद कर हाथ नचा नचा कर उम्मीद के इशारों पर नाचती रंग-बिरंगी , सुंदर और शरारती भांति-भांति की कठपुतलियां ...दलों के सदस्यों के रूप में गुंडा-गर्दी का खेल दिखाती , ईश्वर के नाम पर कहानी गढ़ कर लोगों को गुमराह करती ...बेरोजगारी , अशिक्षा , अवसरों की कमी , निर्रथक पढाई के बोझ से दबी , समाज के जात-पात , आरक्षण और ऊँच-नीच के भेद-भाव का शिकार 'कठ...

Excuse me ! (माफ़ करियेगा)

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , मेल-मुलाकातों , शादी - ब्याहों और दावतों का मौसम पूरे शबाब पर है ...अल्ल्लाह के फज़ल से (भगवान की कृपा से ) कुछ दावतों का invitation भी नसीब हुआ है . कार्ड इंग्लिश और  हिंदी अलग-अलग भाषाओँ में मिले ...पर कुछ निमंत्रण पत्रों में सौभाग्यवती और आयुष्मान को इंग्लिश में पढ़कर वो फीलिंग नहीं आई जो हिंदी में आती है ...इसे मेरा old fashioned होना माना जा सकता है, वैसे मैं नए तरीकों को अपनाने के प्रति खुली सोच रखती हूँ और whatsapp पर अपने सन्देश इंग्लिश वाले अक्षरों में हिंदी में ही लिख भी लेती हूँ , फिर भी जो मजा अपने blog में हिंदी लिखकर आपसे जुड़ने में आता है वो मैं ही समझ सकती हूँ ( वो बात अलग है कि इस हिंदी के चलते ही मैं बहुत सारे लोगो को अपने blog और facebook page से जोड़ नहीं पाई हूँ )....सोशल मीडिया जो कि आजकल संपर्क और अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है ...वो भी 90% अंग्रेजी भाषी है ...पिछले दिनों एक दावत में बहुत सारे बेहतरीन कपड़ों , सजे चेहरों से रूबरू हुयी , कुछ सादा और संजीदा चेहरों ने ध्यान खींचा ...एक ग्रुप college going , अंग्रेजी भाषी , सुघढ़ शरीर व...

फितरत !

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , चन्द लाइन आपकी नज़र ... '' कितनी अजीब है इंसान की फितरत ,     हर अच्छी बुरी बात कुछ दिन में बन जाती है आदत ! चेहरा छुपाना पहले शौक बना ...अब प्रदुषण ने मजबूरी में तब्दील कर दिया , पहले जो महज़ औरतों का था शगल ..पर अब तो मर्द भी ढकतें  हैं शकल,     क्योंकि फितरत तो न हम बदलेंगे ना ही हवा   हम उसे गन्दा करेंगे और वो हमें  ...     और फिर यूँ जीना हमारी आदत बन जाएगी .... पानी को ही लीजिये , अपनी फितरत के चलते हम इसे बर्बाद करतें हैं और मौका मिलने पर वो हमें ...और अब ऐसे ही जीने की आदत बन गयी है ... धर्म को ही देखिये ..हम उसका दुरूपयोग कर रहें हैं और वो हमारा , फितरत है सो सुधार हम नहीं लायेंगे ...फिर चाहे धर्म की खातिर फ़ना हो जायेगें क्या फर्क पड़ता है ऐसे ही जीना आदत बनती जा रही है ... पर इंसान का क्या ??? वो अपने ही जैसो पर किसलिए जुल्म ढाता है ?? क्यों हर समाचार अधर्म , कुकर्म , अन्याय , गुस्से , शोषण की ही गाथा गाता है ???      कैसी है ये फितरत जो दिनों-दिन आदत से ज्यादा जूनून...

आखिर धर्म ही क्यों ?

Image
 प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , अभी-अभी समाचारों में राफिया नाज़ , योग शिक्षक को लेकर ताज़ा - तरीन बहस को सुनते हुए मन अजीब से ख्यालों से भर गया ...कहा जा रहा है कि राफिया को योग छोड़ने की नसीहतें दी जा रही हैं, उनके धर्म के मुखियाओं की तरफ से ...शायद इसे एक शारीरिक क्रिया न मान कर किसी धर्म से जोड़ा जा रहा है ... क्या मानना है आपका ?? ये तैराकी को किस धर्म की तरफ रखना चाहेंगें आप ?? शूटिंग ( निशाने बाजी ) किस की तरफ जाएगी ?? ईमानदारी से सोचियेगा क्योकिं तब आप पाएंगे कि हमारे-तुम्हारे की शाखाएं बहुत गहरे कहीं हम सब के फायदों की जड़ों से निकली हैं ...और इन जड़ों  को  पाला-पोसा जाता है निजीस्वार्थ की खातिर . मेरी तरह शायद आपने भी ये गौर किया हो कि हमारे समाज में बहुत से ऐसे काम-धंधें है जिन में किसी धर्म विशेष का वर्चस्व है, लेकिन उन की उपयोगिता और मिलने वाले फायदे हर तबके और धर्म के लिए हैं . ऐसा क्या - क्या है जिसको हम सिर्फ धर्म के आधार पर बाँट सकते हैं  ?? सोचिये आजकल अस्पतालों में खून खरीदा नहीं जाता , खून के बदले खून दिया जाता है ...क्या उस खून के धर्म की जांच होत...

'' कभी जवाब ...कभी पहेली ''

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , चंद लाइने आपकी नज़र हैं ....                                                                       '' कभी जवाब ...कभी पहेली ''     जिंदगी थोड़ी अजीब है ....सबके पास है पर कुछ के ही करीब है ...    माँ के पास है पर ...माँ की गोद के दूध मुहें बच्चे के करीब है,    पढ़ते हुए बच्चे के पास है पर ...ड्राइंग करते बच्चे के करीब है,    पापा के पास भी है पर ...क्रिकेट देखते पापा के करीब है,   दादी के पास है पर ...मिठाई  खाती दादी के करीब है, जिंदगी थोड़ी अजीब है....कुछ की है दोस्त तो कुछ की रकीब है... कार  में बैठे बच्चे की है दोस्त तो..... बाहर से हाथ बढ़ाकर भीख मांगते बच्चे की रकीब है, करोडपती कारोबारी की है दोस्त तो ...क़र्ज़ के लिए जान पर देने वाले किसान की रकीब है, मंदिर में गुप्त दान करते भक्त की है दोस्त तो ...बाहर प्रसाद के ...

यूँ ही ( जिन्दगी )

Image
प्यार भरा नमस्कार दोस्तों , .................................. इतेफाकन आज एक शख्स को देखकर यूँ ही कुछ लाइनें दिमाग में तैर गयीं तो उन्हें कागज़ पर हर्फों की शक्ल दे डाली ....पसंद आये तो बताईयेगा जरूर ...                                                                     ' रंग - चेहरों के '         ''  नारंगी , नीला , पीला ....हरा                रगों के जैसा ही होता है हर चेहरा ....हरेक अपने में खास, हरेक अपने में अलग           सूने , मुस्काते ,तपते ,उंघते ,उकताते ,चमकदार और भी न जाने कितने प्रकार                 जीवन के हर पहलू से जुड़े चेहरे , सब अपने में खास.... सब अपने में अलग           तीखे , मुलायम , सुर्ख , सर्द , सख्त ,ज़र्द ,मखमली और भी कई जज्बातों ...